सता की भुख सामाजिक मान - सम्मान ओर समाज के लोगो के दुलार से भी बड़ी हो सकती है यह कालवी साब मे कर के दिखा दिया। हजारो राजपूत युवा उनके एक बुलावे पर आ जाते थे। क्योकि वो एक सामाजिक नेता थे समाज के बारे मे सोचते थे पर ऐसा नहीं है अब वो एक राजनेता की भाषा बोलने लगे है ओर राजनेता की जबान की कोई अहमियत नहीं है। इस लिए लेख लिखा जा रहा की सता के लोभी केसे अपने जमीर को गिरवी रख कर बिक जाते है ।
कुछ समय पहले दिल्ली मे लोकसभा चुनावों में क्षत्रिय समाज की भूमिका पर मंथन हुआ था जिसमे पूरे भारत से क्षत्रिय समाज के सामाजिक कायकर्ता ओर संस्थापक ने हिसा लिया था जिसमे यह तय हुआ की क्षत्रिय समाज के लोगों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में चुनाव लड़कर संसद में पाहुचाया जाए जिसमे लोकेन्द्र सिंह कालवी जी ने भी अपने विचार रखे वो यह थे
"करणी सेना संस्थापक लोकेन्द्र सिंह कालवी ने क्षत्रिय समाज के लोगों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में चुनाव लड़कर संसद में पहुंचे पर बल दिया, कालवी ने कहा- भले किसी को किसी दल से टिकट मिले समाज पार्टीबाजी से ऊपर उठकर उन्हें जीताये और संसद में भेजे तभी समाज के साथ इस देश का भी भला हो सकता है क्योंकि वर्तमान राजनीतिज्ञ देश को लुटने में लगे और ऐसी दशा में सिर्फ क्षत्रिय समाज के लोग ही आगे आकर इस देश को बचा सकते है क्योंकि यह क्षमता सिर्फ क्षत्रियों में ही है|" इसके बाद लोक सभा चुनावो की घोषणा हो जाती है ओर सभी क्षत्रिय अपने अपने क्षेत्र मे अपना ऊमीद्वार को जीतने की रणनीति बनाने लगे। लोकेन्द्र सिंह कालवी ने भी सपना सजोया की मे भी संसद मे जाऊ इस लिए उन्होने सीकर, चुरू, नागोर ओर झुंझनु के राजपूत समाज के लोगो से से बात की ओर कहा की मेने समाज के इतने साल सेवा की तो मेरा भी कुछ हक बनता है। ओर चुनाव लड़ने की मनसा जाहीर की ओर बहुजन समाज पार्टी से झुझनु सीट से लड़ने की बात कही सभी ने हा भर दी ओर रणनीति मे लग गए ओर 23 मार्च को सभी लोग झुझनु मे कालवी जी को बसपा मे शामिल कर लिया गया ओर उनके नामकन की तेयारी हो रही थी शाम होते होते कालवी साब राजस्थान की मुख्यमंत्री मे बगले पर थे ओर समाज के लोग उनका झुंझनु मे इंतजार कर रहे थी। कालवी साब को फोन किया गया जाता है तो वो कहते है की मे अभी बगड़ मे हु कोई धाम मे अभी आ रहा हु झुंझनु यह कह कर फोन कट कर दिया जाता है । झुंझनु मे बेठे लोगो को समाचारो के जरिए पता चलता है की कालवी साब ने बीजेपी जॉइन कर ली ऐसे राजपूत नेताओ से आप क्या आशा रख सकते हो जो अपने छोटे भाइयो की शहीद दिवस के दिन राजनेतिक हत्या करके समाज का भला करने के लिए बीजेपी मे चले गए। समाजिकता के चोगे मे 4 साल तक रहे ओर फिर राजनेता बनकर अपना स्वार्थ साधने लगे ऐसे नेताओ का हमे हमेसा विरोध करना चाहिय। ओर श्री राजपूत युवा परिषद हमेसा विरोध करती रहेगी "जो अपनी कॉम का नहीं वो किसी का नहीं हो सकता है" यह कालवी साब का ही नारा था ओर आज वो अपनी कॉम के ही नहीं रहे है।

कालवी साहब का भाजपा में जाने का उनका व्यक्तिगत फायदा पता नहीं होगा या नहीं पर हाँ हम जैसे लोग जो राजपूत समाज को भाजपा की मानसिक गुलामी से निकालने के लिए जो अभियान छेड़े हुए थे को हानि जरुर पहुंची है !
ReplyDeleteसाथ ही जसवंत सिंह जी प्रकरण के तुरंत बाद कालवी जी का भाजपा में जाना सही वक्त नहीं कहा जा सकता, क्योंकि इस वक्त जाने से समाज के युवाओं का उन पर से भरोसा उठा है जो कालवी जी के लिए भी शुभ नहीं है !
अब तो चोड चकान ही साब की धुल धानी करबा लाग्ग्या लोग बाग़ ... समझ म कोणी आ रयो है की लोगा न कालवी जी सु व्यक्तिगत इड है काई झ को अबार निकाल बा म लाग रया र्है.. और आखिर उन्ही करनी सेनिको ने यह हाल किया है हमाँरे सेनापति का ...!!!! हद ही कर दी भाइयो ने अब तो ... काश कालवी जी भी कुछ सही गलत का विचार कर पाते !!!!!!!
ReplyDeleteकालवी साब पर एक अगुली उठाने से पहले एकजान लो की की बाकि की अगुलिया की दिशा की तरफ है जाहिर सी बात है खुद की तरफ आज कालवी साब बीजेपी चले गये तो उनको सत्ता की भूख हो गयी वाह रे सामाजिक ठेकेदारों किसको नहींहै भूख ???? जब कालवी साब कांगेस में तब भी चिंतन शिविर पर घेराव किसने किया???आज आपके भगवान् सिंह जी केवल बाड़मेर तक ही सिमित है बाकि सीटो पर क्यों बीजेपी के खिलाफ नहीं बोल रहे है वहा जाटो को वोट दिलवा रहे है और आप लोग तुलना कर लीजिये जितना कालवी साब ने साधारण राजपूत की आवाज उठायी या युवावो को आगे लाये वो किसी ने भी नहीं किया है
ReplyDeleteसमाज का नेतृत्व करने वालों को समाज के रुतबे का खयाल भी रखना चाहिए , ना की अपने हित के लिए समाज की भावनाओं से खिलवाड़ किया जाए।
ReplyDeletekalvi saab bjp me gaye us se koi problem nahi hai hum . jis time wo bjp me gaye hai wo sabse bada muda hai, bjp jis parkar se rajputo ko lat maar rahi hai ussi teji se rajput bjp ke karib ja rahe hai. jab rolsaabsar fatwa jari karte hai to log pani pi kar galiya de rahe the . ab pata nahi un logo pani nahi mil raha ya un logo ko kalvi ke guda ka dar lag raha hai ya un logo ko koi fayege ki chehta hai .kalvi ab kah rahe hai ki rajput or karni sena bjp ke sath hai .
ReplyDelete